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साईं बाबा का अपने भक्त को गीता पढने के लिए कहना


साईं बाबा के विरोधी कहते हैं कि साईं बाबा हमेशा ही मुस्लिम धर्म से सम्बंधित बाते ही बोला करते थे, उनके झूठ का पर्दाफाश इस कथा से हो जाएगा - 

ब्रह्मविद्या (अध्यात्म) का जो भक्त अध्ययन करते थे, उन्हें साईं बाबा सदैव प्रोत्साहित करते थे। इसका एक उदाहरण है कि एक समय बापूसाहेब जोग का एक पार्सल आया, जिसमें श्री लोकमान्य तिलक कृत गीता-भाष्य की एक प्रति थी, जिसे काँख में दबाये हुये वे मस्जिद में आये। जब वे चरण-वन्दना के लिये झुके तो वह पार्सल बाबा के श्री-चरणों पर गिर पड़ा। तब बाबा उनसे पूछने लगे कि इसमें क्या है। श्री जोग ने तत्काल ही पार्सल से वह पुस्तक निकालकर बाबा के कर—कमलों में रख दी। बाबा ने थोड़ी देर उसके कुछ पृष्ठ देखकर जेब से एक रुपया निकाला और उसे पुस्तक पर रखकर जोग को लौटा दिया और कहने लगे कि, "इसका ध्यानपूर्वक अध्ययन करते रहो, इससे तुम्हारा कल्याण होगा।" (श्री साई सच्चरित्र, अध्याय 27)

साईं बाबा और बकरा काटने का सच - साईं विरोधियों का सबसे बड़ा पर्दाफाश

(फोटो पर क्लिक करके इसका आकार बड़ा किया जा सकता है.. )

साईं बाबा के विरोधी हमेशा ही कहते रहते हैं ( कॉपी पेस्ट करते रहते हैं ) कि साईं बाबा बकरा काटते थे, साईं बाबा बकरा कटवाते थे.. आज हम आपको बता रहे हैं कि इस बकरे के काटने के पीछे की असली कहानी क्या थी और क्या बकरा सचमुच में काटा भी गया था या नहीं ... ?

साईं बाबा का वर्षा और अग्नि पर नियंत्रण करना


साईं बाबा - एक हठयोगी


साईं बाबा के तमाम चमत्कारों का जिक्र आपने सुना भी होगा और आप में से कई साईं भक्त हैं जिन्होंने उनके चमत्कारों को देखा भी है। लेकिन बहुत कम साई भक्त ऐसे हैं जो ये जानते हैं कि बाबा ने इस शक्ति को हासिल करने के लिए योग की कैसी साधना की थी।

साईं चरित्र किताब के चौदहवें अध्याय में एक बड़ी ही विचित्र घटना का जिक्र है। उस घटना से पता चलता है कि साईं बाबा एक बहुत बड़े योगी भी थे। और योगी भी ऐसे वैसे नहीं बल्कि एक बहुत बड़े हठ योगी।

शिर्डी के आस पास के इलाकों में आज भी ऐसे साईं भक्त हैं जो उनकी इस विद्या का रहस्य जानते हैं। वैसे तो साईं 1860 में पहली बार शिर्डी आए थे। तकरीबन सोलह साल की उम्र में।

लिहाजा वहां के लोग उन्हें कोई खास तरजीह नहीं देते थे। लेकिन शिर्डी में एक द्वारकामाई की कुटिया थी जहां वो लोगों के सारे ताने सहने के बावजूद रहते थे और गरीबों के दुख दूर किया करते थे। धीरे धीरे उनके चमत्कारी इलाज की बात आसपास के लोगों में फैलने लगी।

लेकिन बाबा के इन चमत्कारों का हठ योग से क्या रिश्ता था। रिश्ता था। म्हाल्सापति नागरे और बैजाबाई नाम के दो साईं भक्तों ने अपनी आंखों से उन्हें हठयोग करते देखा था। वो हठयोग की कौन सी विधा में महारत रखते थे ये जानने से पहले आपको जानना होगा एक ऐसी जगह को जहां बाबा इस विद्या की साधना करते थे।

जैसा कि आप जानते हैं कि द्वारकामाई में बाबा भक्तों का इलाज करते थे। वहीं से 200 मीटर की दूरी पर लेंडीपाडा नाम की एक जगह थी जो अब एक सुंदर बगीचे में तब्दील हो गई है। यहीं पर एक कुंआ था जहां बाबा अक्सर स्नान करने आते थे। स्नान करने के बाद वो हठयोग की ऐसी विद्या की साधना करते थे जिसके बारे में सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे।

वैसे तो हठ योग में ऐसी ऐसी साधना है जिनपर आम आदमी यकींन नहीं कर सकता। लेकिन साईं भी हठ योग करते थे ये बात बहुत कम ही लोग जानते हैं।

साईं चरित्र में जिक्र है कि बाबा कुंए पर स्नान करने के बाद उत्तर दिशा में मुंह कर के बैठ जाते थे। और अपने हठ योग बल से पेट की अंतड़ियों को बाहर निकाल देते थे।

हालांकि ये साधना वो रोज नहीं किया करते थे। हठ योग की इस साधना का उपयोग वो पूर्णिमा के दिन ही करते थे।

उनके हठ योग की एक और मिसाल तब सामने आई जब उन्होंने अपने भक्तों से कहा कि वो दो दिनों तक किसी से बात नहीं कर पाएंगे। और ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि उन्हें शव आसन करना था।

शव आसन भी हठ योग के अहम साधनों में से एक है। इसमें साधक एक शव की तरह जमीन पर सो जाता है। बहुत हद तक योगी इसका उपयोग योग निद्रा के लिए करते हैं।

लेकिन इस आसन के सध जाने के बाद योगी की आत्मा शरीर को छोड़कर बाहर भी निकल सकती है। अगर साईं बाबा इस आसन को करते थे तो इसका मतलब ये हुआ कि उन्हें हठ योग में महारत हासिल थी।

इसका मतलब ये हुआ कि साईं साधना का सबसे बड़ा मार्ग हठ योग ही था। ये तो कुछ लोगों के अनुभव हैं। लेकिन बीच बीच में साईं लंबे समय के लिए कहीं चले जाते थे। कई बार अपने खास भक्तों को भी कुछ नहीं बताते थे। जाहिर है कहीं न कहीं वो अपनी साधना में इतने रम जाते थे कि समय का ज्ञान नहीं होता था।

दुनिया आज साईं का चमत्कार देख रही है। अपने आखिरी वक्त से थोड़ा पहले उन्होंने अपने भक्त को कहा भी था कि वो शरीर छोड़ देंगे लेकिन जाएंगे कहीं नहीं। इसलिए जो भी भक्त श्रद्धा से उनके दरबार में जाएगा उसकी मुराद जरुर पूरी होगी। और हो भी यही रहा है। ॐ साईं राम .. 

‪#‎exposeantisai‬ (-From khabar ibnlive in com)

साईं बाबा और चाँद मियां (पाटिल) की असली कहानी


जिला औरंगाबाद (निजाम स्टेट) के धूप ग्राम में चाँद पाटील नामक एक धनवान् मुस्लिम रहते थे । जब वे औरंगाबाद जा रहे थे तो मार्ग में उनकी घोड़ी खो गई । दो मास तक उन्होंने उसकी खोज में घोर परिश्रम किया, परन्तु उसका कहीं पता न चल सका । अन्त में वे निराश होकर उसकी जीन को पीट पर लटकाये औरंगाबाद को लौट रहे थे । तब लगभग 14 मील चलने के पश्चात उन्होंने एक आम्रवृक्ष के नीचे एस फकीर को चिलम तैयार करते देखा, जिसके सिर पर एक टोपी, तन पर कफनी और पास में एक सटका था । फकीर के बुलाने पर चाँद पाटील उनके पास पहुँचे । जीन देखते ही फकीर ने पूछा यह जीन कैसी । चाँद पाटील ने निराशा के स्वर में कहा क्या कहूँ मेरी एक घोड़ी थी, वह खो गई है और यह उसी की जीन है ।

फकीर बोले – थोड़ा नाले की ओर भी तो ढूँढो । चाँद पाटील नाले के समीप गये तो अपनी घोड़ी को वहाँ चरते देखकर उन्हें महान् आश्चर्य हुआ। उन्होंने सोचा कि फकीर कोई सामान्य व्यक्ति नहीं, वरन् कोई उच्च कोटि का मानव दिखलाई पड़ता है । घोड़ी को साथ लेकर जब वे फकीर के पास लोटकर आये, तब तक चिलम भरकर तैयार हो चुकी थी । केवल दो वस्तुओं की और आवश्यकता रह गई थी। एक तो चिलम सुलगाने के लिये अग्नि और दितीय साफी को गीला करने के लिये जल की ।फकीर ने अपना चिमटा भूमि में घुसेड़ कर ऊपर खींचा तो उसके साथ ही एक प्रज्वलित अंगारा बाहर निकला और वह अंगारा चिलम पर रखा गया । 

फिर फकीर ने सटके से ज्योंही बलपूर्वक जमीन पर प्रहार किया, त्योंही वहाँ से पानी निकलने लगा ओर उसने साफी को भिगोकर चिलम को लपेट लिया । इस प्रकार सब प्रबन्ध कर फकीर ने चिलम पी ओर तत्पश्चात् चाँद पाटील को भी दी । यह सब चमत्कार देखकर चाँद पाटील को बड़ा विस्मय हुआ । चाँद पाटील ने फकीर ने अपने घर चलने का आग्रह किया । 

दूसरे दिन चाँद पाटील के साथ फकीर उनके घर चला गया । और वहाँ कुछ समय तक रहा । पाटील धूप ग्राम की अधिकारी था और बारात शिरडी को जाने वाली थी । इसलिये चाँद पाटील शिरडी को प्रस्थान करने का पूर्ण प्रबन्ध करने लगा । फकीर भी बारात के साथ ही गया । विवाह निर्विध्र समाप्त हो गया और बारात कुशलतापू्र्वक धूप ग्राम को लौट आई । परन्तु वह फकीर शिरडी में ही रुक गया और जीवनपर्यन्त वहीं रहा । ‪#‎exposeantisai‬

साईं बाबा के विरोधियों का पर्दाफाश


साईं बाबा के विरोधी सिर्फ झूठ का खेल खेलकर दुनिया को मुर्ख बना रहे हैं ... श्री साई सच्चरित्र के अध्यायों में से बीच की कुछ पक्तियां कॉपी कर कर के अजीब अजीब और बचकाने से तर्क दे रहे हैं ..यदि उन पक्तियों के पूरे पैराग्राफ को पढ़ा जाए तो उनका अर्थ बहुत ही सकारात्मक निकलता है ..

साईं विरोधियों की गन्दी मानसकिता का पता इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इन्होने विकीपीडिया पर साईं बाबा के हिंदी पेज को भी तहस-नहस कर दिया है, अगर आप इसी पेज का इंग्लिश वर्जन देखे तो सत्य पता लग जाएगा..

मैं यहाँ श्री साई सच्चरित्र की ऑनलाइन लिंक दे रहा हूँ जिस किसी को भी साईं विरोधियों द्वारा श्री साई सच्चरित्र से दी गई पक्तियों पर अधिक जानकारी या सत्य जानना हो वो इस लिंक पर जाकर अपना संशय दूर कर सकता है .. 


जिनको श्री साई सच्चरित्र के इस ऑनलाइन वर्जन पर शक हो वो किसी भी धार्मिक पुस्तको की दूकान से यह पुस्तक स्वयं पढ़कर देख ले .. सत्य और असत्य का पता चल जाएगा और साईं बाबा के विरोधियों का पर्दाफाश भी हो जाएगा..

सभी साईं बाबा के भक्तो से अनुरोध है कि इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि लोगो को सत्य और असत्य का पता लग सके ..